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भक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति: श्री हित रूपलाल जी गोस्वामी—जिनकी निष्ठा ने संप्रदाय को दी नई दिशा
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति: श्री हित रूपलाल जी गोस्वामी—जिनकी निष्ठा ने संप्रदाय को दी नई दिशा

रूपलाल जी को भक्ति और शास्त्र ज्ञान विरासत में मिला था। उनके पूर्वजों ने श्री राधावल्लभ लाल की सेवा को ही अपना जीवनोद्देश्य माना था। रूपलाल जी ने अल्पायु में ही संप्रदाय के..

भक्ति और साहित्य के अप्रतिम संगम: श्री हित नागरी दास जी गोस्वामी का दिव्य जीवन
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति और साहित्य के अप्रतिम संगम: श्री हित नागरी दास जी गोस्वामी का दिव्य जीवन

श्री हित नागरी दास जी का जन्म संवत 1820 के आसपास वृंदावन के प्रतिष्ठित गोस्वामी परिवार में हुआ था। वे श्री हित हरिवंश महाप्रभु की परंपरा के उत्तराधिकारी थे।

 श्री चैतन्य चरितामृत प्रकाट्य विशेष लेख : प्राकट्य की मंगल बधाई
·गौड़िया वैष्णव आचार्य·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री चैतन्य चरितामृत प्रकाट्य विशेष लेख : प्राकट्य की मंगल बधाई

उस समय कृष्णदास कविराज गोस्वामी अत्यंत वृद्ध थे (लगभग 80-90 वर्ष) और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं था। किंतु, वैष्णवों की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए, उन्होंने इस दैवीय कार्य का संकल्प लिया।

 ब्रज रस के अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु – प्रेम भक्ति का वो मार्ग जहाँ 'राधा' ही सर्वोपरि हैं
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

ब्रज रस के अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु – प्रेम भक्ति का वो मार्ग जहाँ 'राधा' ही सर्वोपरि हैं

हरिवंश महाप्रभु ने 'राधावल्लभ संप्रदाय' की नींव रखी। इस संप्रदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ श्री राधा को ही 'अधिष्ठात्री देवी' माना जाता है।

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