
भक्ति के अमर स्तंभ श्री पीपा जी महाराज का दिव्य चरित्र
श्री नाभादास जी महाराज कृत 'श्री भक्तमाल' के अनमोल मणियों में 'राजर्षि' से 'ब्रह्मर्षि' बनने वाले परम भक्त श्री पीपा जी महाराज का चरित्र अत्यंत विलक्षण है।

श्री नाभादास जी महाराज कृत 'श्री भक्तमाल' के अनमोल मणियों में 'राजर्षि' से 'ब्रह्मर्षि' बनने वाले परम भक्त श्री पीपा जी महाराज का चरित्र अत्यंत विलक्षण है।

धन्य धन्य नरहरि गुरु, ज्ञान रूप अवतार। तुलसी से जगमग किये, दे भक्ति को सार

प्राचीन काल में महीध्वज नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई 'वज्रध्वज' अत्यंत क्रूर, अधर्मी और अपने बड़े भाई से द्वेष रखने वाला था।

श्रीवास आंगन धन्य है, जहाँ नाचे गौर निताई। भक्ति शक्ति परकट भई, कलिमल दियो नसाई ॥