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शैव परंपरा का सनातन इतिहास: उत्पत्ति, वैदिक-अगम मूल, सिद्ध संत, शंकराचार्य परंपरा व आधुनिक पुनर्जागरण
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

शैव परंपरा का सनातन इतिहास: उत्पत्ति, वैदिक-अगम मूल, सिद्ध संत, शंकराचार्य परंपरा व आधुनिक पुनर्जागरण

मोहनजोदड़ों से प्राप्त 'पशुपति सील' (Pashupati Seal) शैव परंपरा का प्राचीनतम भौतिक प्रमाण मानी जाती है। इस सील में त्रिमुखीय और ध्यानावस्थित एक आकृति दर्शायी गई है, जिसके चारों ओर पशु (व्याघ्र, हाथी, गैंडा और भैंसा) विराजमान हैं।

श्री रुद्र संप्रदाय का प्राकट्य, दार्शनिक विकास और वर्तमान धरातल
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री रुद्र संप्रदाय का प्राकट्य, दार्शनिक विकास और वर्तमान धरातल

भगवान शिव (रुद्र) द्वारा जगत के कल्याण हेतु विष्णु-ज्ञान के प्रथम उपदेश से प्रारंभ हुआ यह संप्रदाय आज शताब्दियों की यात्रा तय कर विभिन्न शाखाओं में प्रस्फुटित हो चुका है।

भक्ति मार्ग का प्राचीनतम आधार—निम्बार्क संप्रदाय की संपूर्ण विकास-यात्रा, दर्शन और वर्तमान प्रासंगिकता
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति मार्ग का प्राचीनतम आधार—निम्बार्क संप्रदाय की संपूर्ण विकास-यात्रा, दर्शन और वर्तमान प्रासंगिकता

यह संप्रदाय केवल भक्ति मार्ग का प्रतिपादन नहीं करता, बल्कि द्वैत (भेद) और अद्वैत (अभेद) के बीच समन्वय स्थापित करते हुए 'द्वैताद्वैत दर्शन' का अत्यंत वैज्ञानिक व तार्किक ढांचा प्रस्तुत करता है।

 सनातन परंपरा की रीढ़ 'श्री वैष्णव संप्रदाय' – उत्पत्ति, दर्शन, विभाजन का इतिहास और वर्तमान स्थिति
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

सनातन परंपरा की रीढ़ 'श्री वैष्णव संप्रदाय' – उत्पत्ति, दर्शन, विभाजन का इतिहास और वर्तमान स्थिति

भारतीय संस्कृति और वैदिक दर्शन में 'श्री वैष्णव संप्रदाय' (Sri Vaishnavism) का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण और शीर्षस्थ है। यह संप्रदाय केवल एक धार्मिक मार्ग नहीं, बल्कि दर्शन, साहित्य, सामाजिक समरसता और मंदिर प्रबंधन की एक सुव्यवस्थित प्रणाली है।

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