
ब्रज रस के अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु – प्रेम भक्ति का वो मार्ग जहाँ 'राधा' ही सर्वोपरि हैं
हरिवंश महाप्रभु ने 'राधावल्लभ संप्रदाय' की नींव रखी। इस संप्रदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ श्री राधा को ही 'अधिष्ठात्री देवी' माना जाता है।

हरिवंश महाप्रभु ने 'राधावल्लभ संप्रदाय' की नींव रखी। इस संप्रदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ श्री राधा को ही 'अधिष्ठात्री देवी' माना जाता है।

उस समय कृष्णदास कविराज गोस्वामी अत्यंत वृद्ध थे (लगभग 80-90 वर्ष) और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं था। किंतु, वैष्णवों की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए, उन्होंने इस दैवीय कार्य का संकल्प लिया।

श्री हित नागरी दास जी का जन्म संवत 1820 के आसपास वृंदावन के प्रतिष्ठित गोस्वामी परिवार में हुआ था। वे श्री हित हरिवंश महाप्रभु की परंपरा के उत्तराधिकारी थे।

'वृंदावन की रेणु' (धूल) को ही अपना सर्वस्व मानने वाले व्यास जी वह आज भी करोड़ों भक्तों का संबल है। आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं को उजागर