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भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास

भगवान शिव काल के भी काल 'महाकाल' बनकर शिवलिंग से प्रकट हो गए और यमराज को परास्त कर मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। भक्त की रक्षा के लिए मृत्यु के नियम को बदल देना शिव के भक्त-प्रेमी स्वभाव को दर्शाता है।

रिद्धि सिद्धि के स्वामी होकर भी त्यागी व भक्तों में श्रेष्ठ है भगवान गणेश
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

रिद्धि सिद्धि के स्वामी होकर भी त्यागी व भक्तों में श्रेष्ठ है भगवान गणेश

प्रायः देखा जाता है कि जब किसी साधक या संत को सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं, तो उसमें अहंकार प्रवेश कर जाता है। परंतु श्री गणेश ....

महाप्रभु के अनन्य साधक श्री जगदीश दास बाबाजी: करुणा, विनम्रता और अखंड वैष्णव साधना की अमर गाथा
·गौड़िया वैष्णव आचार्य·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

महाप्रभु के अनन्य साधक श्री जगदीश दास बाबाजी: करुणा, विनम्रता और अखंड वैष्णव साधना की अमर गाथा

तिरोभाव उत्सव विशेष : श्री बाबा महाराज कहते थे कि याद रखो जीव की आध्यात्मिक प्रगति रातों-रात नहीं होती। आत्मा धीरे-धीरे, एक-एक कदम करके आगे बढ़ती है।

गुंडिचा मार्जन: भक्ति, सेवा और हृदय की शुद्धि का महापर्व
·उत्सव विशेष·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

गुंडिचा मार्जन: भक्ति, सेवा और हृदय की शुद्धि का महापर्व

श्री चैतन्य महाप्रभु के पुरी आने से पहले, गुंडीचा मंदिर की सफाई जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, राजा के सेवकों और स्थानीय सफाई कर्मचारियों द्वारा की जाती थी। श्री चैतन्य महाप्रभु पुरी आए, तो उन्होंने इस साधारण सफाई कार्य को 'महा-मार्जन लीला' का रूप दे दिया।

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