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परम भागवत महर्षि वशिष्ठ: ज्ञान, गुरुता एवं अनन्य भक्ति का दिव्य स्वरूप
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

परम भागवत महर्षि वशिष्ठ: ज्ञान, गुरुता एवं अनन्य भक्ति का दिव्य स्वरूप

भक्ति मार्ग में साधक का ध्येय भगवान की शरणागति और उनके चरणों में अनन्य प्रेम प्राप्त करना होता है। ज्ञानी प्रायः 'सोऽहम्' (मैं वह हूँ) के भाव में लीन रहता है, परंतु परम भक्त 'दासोऽहम्' (मैं प्रभु का दास हूँ) के भाव में आनंद का अनुभव करता है। म

महात्मा विदुर: निष्काम भक्ति, धर्म और शरणागति के सर्वोच्च प्रतीक
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

महात्मा विदुर: निष्काम भक्ति, धर्म और शरणागति के सर्वोच्च प्रतीक

"न मे भक्तः प्रणश्यति" (मेरे भक्त का कभी विनाश नहीं होता) — श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्री कृष्ण का यह वचन महात्मा विदुर के जीवन में शत-प्रतिशत चरित्रार्थ होता है।

संत श्रेष्ठ स्वपच जी (सुदर्शन स्वपच): भक्ति, निष्ठा और अलौकिक लीलाओं का अमर चरित्र
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

संत श्रेष्ठ स्वपच जी (सुदर्शन स्वपच): भक्ति, निष्ठा और अलौकिक लीलाओं का अमर चरित्र

निम्न वर्ग कुल में जन्म लेने के बावजूद अपनी अनन्य निष्ठा, निरहंकार, और निश्छल भक्ति के बल पर उन्होंने स्वयं भगवान श्री कृष्ण को यह सिद्ध करने पर मजबूर कर दिया कि "जाति-पांति पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।"

शबरी जी का भक्ति दर्शन: प्रेम, प्रतीक्षा और समर्पण का अनुपम महाकाव्य
·Saints·By प्रमोद कुमार शुक्ला

शबरी जी का भक्ति दर्शन: प्रेम, प्रतीक्षा और समर्पण का अनुपम महाकाव्य

गुरु के इन वचनों को शबरी जी ने अपने जीवन का एकमात्र महामंत्र बना लिया। गुरुदेव तो परमधाम गमन कर गए, परंतु शबरी जी के हृदय में जलाकर गए प्रतीक्षा का वह दीप, जो दशकों तक अविरल जलता रहा।

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