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भक्ति की त्रिवेणी के अनमोल रत्न: भक्तकवि श्री हरिराम व्यास जी का जीवन और दर्शन
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति की त्रिवेणी के अनमोल रत्न: भक्तकवि श्री हरिराम व्यास जी का जीवन और दर्शन

'वृंदावन की रेणु' (धूल) को ही अपना सर्वस्व मानने वाले व्यास जी वह आज भी करोड़ों भक्तों का संबल है। आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं को उजागर

श्री हित गोपीनाथ जी – 'हित' वंश के सेवा-पुंज और अनन्य शरणागति के साक्षात स्वरूप
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री हित गोपीनाथ जी – 'हित' वंश के सेवा-पुंज और अनन्य शरणागति के साक्षात स्वरूप

श्री हित गोपीनाथ जी एक उच्च कोटि के पदकार भी थे। उनके पदों में विप्रलम्भ (विरह) और संयोग (मिलन) दोनों का अद्भुत चित्रण मिलता है। उनके द्वारा रचित पदों को संप्रदाय के 'समाज गायन' में बहुत आदर के साथ गाया जाता है।

श्री हित वनचंद्र जी – राधावल्लभ संप्रदाय के वह 'चंद्र' जिन्होंने भक्ति की चांदनी को घर-घर पहुँचाया
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री हित वनचंद्र जी – राधावल्लभ संप्रदाय के वह 'चंद्र' जिन्होंने भक्ति की चांदनी को घर-घर पहुँचाया

'अनन्यमाल' (चाचा हित वृंदावन दास कृत) में उल्लेख है कि वनचंद्र जी की वाणी में ऐसी मोहिनी थी कि जो भी उनसे मिलता, वह राधावल्लभ लाल का होकर रह जाता था।

भक्ति और स्थापत्य का संगम: जयपुर का श्री राधा गोविंद देव मंदिर
·प्राचीन सप्त देवालय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति और स्थापत्य का संगम: जयपुर का श्री राधा गोविंद देव मंदिर

पहले इन्हें आमेर के कनक वृंदावन में रखा गया और बाद में सिटी पैलेस के 'चंद्र महल' के ठीक सामने स्थापित किया गया, ताकि राजा अपने महल की खिड़की से सीधे भगवान के दर्शन कर सकें।

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