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श्री हित गोपीनाथ जी – 'हित' वंश के सेवा-पुंज और अनन्य शरणागति के साक्षात स्वरूप
·श्री हित राधावल्लभ संप्रदाय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री हित गोपीनाथ जी – 'हित' वंश के सेवा-पुंज और अनन्य शरणागति के साक्षात स्वरूप

श्री हित गोपीनाथ जी एक उच्च कोटि के पदकार भी थे। उनके पदों में विप्रलम्भ (विरह) और संयोग (मिलन) दोनों का अद्भुत चित्रण मिलता है। उनके द्वारा रचित पदों को संप्रदाय के 'समाज गायन' में बहुत आदर के साथ गाया जाता है।

भक्ति और स्थापत्य का संगम: जयपुर का श्री राधा गोविंद देव मंदिर
·प्राचीन सप्त देवालय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति और स्थापत्य का संगम: जयपुर का श्री राधा गोविंद देव मंदिर

पहले इन्हें आमेर के कनक वृंदावन में रखा गया और बाद में सिटी पैलेस के 'चंद्र महल' के ठीक सामने स्थापित किया गया, ताकि राजा अपने महल की खिड़की से सीधे भगवान के दर्शन कर सकें।

भक्ति का शाश्वत केंद्र: श्री राधा मदन मोहन जी और गौड़ीय परंपरा का उदय
·प्राचीन सप्त देवालय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्ति का शाश्वत केंद्र: श्री राधा मदन मोहन जी और गौड़ीय परंपरा का उदय

इतिहास कहता है कि करौली के महाराजा गोपाल सिंह जी की रानी, जो जयपुर की राजकुमारी थीं, मदन मोहन जी की अनन्य भक्त थीं। उनकी जिद और भक्ति के वशीभूत होकर, अंततः संवत 1705 के आसपास इन विग्रहों को करौली

ब्रज की अनमोल धरोहर: श्री राधा गोपीनाथ मंदिर जहाँ आज भी गूँजती है मधु पंडित की अटूट भक्ति
·प्राचीन सप्त देवालय·By प्रमोद कुमार शुक्ला

ब्रज की अनमोल धरोहर: श्री राधा गोपीनाथ मंदिर जहाँ आज भी गूँजती है मधु पंडित की अटूट भक्ति

भक्तों का विश्वास है कि श्री गोपीनाथ जी के दर्शन करने से भगवान के वक्षस्थल (हृदय) के दर्शन का फल प्राप्त होता है। यहाँ राधा जी के साथ ललिता सखी और विशाखा सखी की भी पूजा की जाती है

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