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श्री प्रमदरा वन: जहाँ आज भी गूँजती है ठाकुर जी के आनंद की मुरली
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री प्रमदरा वन: जहाँ आज भी गूँजती है ठाकुर जी के आनंद की मुरली

"प्रमदं नाम तद्वनं सर्वपापप्रणाशनम्। तत्र गत्वा नरो देवि मम लोके महीयते॥" (हे देवि! प्रमद नाम का वह वन सभी पापों का नाश करने वाला है। वहाँ जाने वाला मनुष्य मेरे लोक को प्राप्त करता है।)

पावन नंदिश्वर वन: जहाँ गिरिराज रूप में महादेव आज भी दे रहे हैं श्रीकृष्ण को कंधा
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

पावन नंदिश्वर वन: जहाँ गिरिराज रूप में महादेव आज भी दे रहे हैं श्रीकृष्ण को कंधा

"नन्दीश्वरं गिरीन्द्रं च दृष्ट्वा नत्वा विधानतः। कृष्णस्य सदनं गत्वा मुच्यते सर्वपातकैः॥" (नंदिश्वर गिरि के दर्शन और वंदन करने से मनुष्य सभी पातकों से मुक्त होकर कृष्ण धाम को प्राप्त होता है।)

 पावन श्री गोकुल वन — जहाँ साक्षात ब्रह्म ने किया था बाल-लीला का विस्तार
·बृजमंडल : चौबीस उपवन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

पावन श्री गोकुल वन — जहाँ साक्षात ब्रह्म ने किया था बाल-लीला का विस्तार

“गच्छनन्द्ब्रजं तात तत्र नन्दयशोदयोः। कृष्णं रामं च संरक्षन् गोपगोपीजनैर्वृतः॥” ग्रंथों के अनुसार, गोकुल वन का विस्तार यमुना के तट पर सघन कुंजों और विशाल चरागाहों के रूप में था। यह वन केवल वृक्षों का समूह नहीं, बल्कि 'गो-कुल' (गायों का परिवार) का आश्रय स्थल था।

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