
श्री गोपीनाथ के प्राणप्रिय श्री मधु पंडित गोस्वामी: भक्ति और सेवा की मूक क्रांति
मान्यता है कि वृंदावन के प्रसिद्ध 'वंशीवट' (जहाँ कृष्ण वंशी बजाया करते थे) के पास यमुना के किनारे मधु पंडित को भगवान गोपीनाथ का अत्यंत सुंदर विग्रह प्राप्त हुआ।

मान्यता है कि वृंदावन के प्रसिद्ध 'वंशीवट' (जहाँ कृष्ण वंशी बजाया करते थे) के पास यमुना के किनारे मधु पंडित को भगवान गोपीनाथ का अत्यंत सुंदर विग्रह प्राप्त हुआ।

जब चैतन्य महाप्रभु ने नवद्वीप में संकीर्तन आंदोलन शुरू किया, तब लोकनाथ जी उनके मुख्य पार्षदों में से एक बन गए। लेकिन जब महाप्रभु ने सन्यास लेने का निश्चय किया, तो लोकनाथ जी का हृदय वियोग की आशंका से भर गया।

इतिहासकारों और गौड़ीय वैष्णव ग्रंथों के अनुसार, श्री भूगर्भ गोस्वामी और उनके घनिष्ठ मित्र श्री लोकनाथ गोस्वामी वे पहले दो व्यक्ति थे, जिन्हें चैतन्य महाप्रभु ने वृंदावन के लुप्त तीर्थों का उद्धार करने के लिए सबसे पहले भेजा था।

उस समय बरसाना का क्षेत्र सघन जंगलों से ढका था और राधा रानी का प्राचीन मंदिर खंडित या लुप्त प्राय था। मान्यता है कि श्री राधा जी ने स्वयं उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और उस स्थान का संकेत दिया जहाँ उनका विग्रह दबा हुआ था।