अंकित जी को एक अत्यंत सम्मानित और बौद्धिक परिवेश विरासत में मिला है। देश और दुनिया की कई शीर्ष और बहुराष्ट्रीय (MNC) फार्मास्युटिकल कंपनियों और कॉर्पोरेट की ऊंचाइयों को छोड़कर अंकित जी का 'खबर4इंडिया' से जुड़ना कोई संयोग नहीं.....
अनवसर के 15 दिनों में उनकी मूर्तियों की मरम्मत, लेपन और नया श्रृंगार पूरी तरह से 'दइतापति' सेवकों द्वारा अत्यंत गोपनीयता के साथ किया जाता है, जो खुद को भगवान का वंशज मानते हैं।
इस स्थान की आधुनिक गुरु परंपरा में श्री श्री 108श्री बालकृष्ण दास जी महाराज का नाम परम आदरणीय है। वे इस स्थान के अत्यंत तेजस्वी और भगवद्-प्राप्त संत थे
ब्रज मंडल के पावन धाम नंदगांव में स्थित श्री टेर कदम्ब केवल एक स्थल नहीं, बल्कि साक्षात द्वापरयुग की दिव्य लीलाओं का जीवंत केंद्र है।
राजा सवाई जयसिंह की सभा में मात्रा 10 वर्ष की आयु में श्री वंशी अली जी ने अपनी विद्वत्ता का ऐसा परिचय दिया कि राजा जयसिंह ने इन्हें अपने गुरु-तुल्य स्थान दिया
भगवान शिव जिस स्थान पर बैठकर दर्शन की 'आशा' में प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी स्थान को आशेश्वर कहा गया।
सीधे ब्रज के आंतरिक क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए ब्रिटिश पी.डब्ल्यू.डी. (PWD) और तत्कालीन रेल नेटवर्क के समन्वय से इस मीटर-गेज लाइन का विस्तार किया गया था।
ब्रह्मगिरी और विष्णुगिरी पहाड़ियों के बीच की जो ढलान वाली घाटी है, वह घने वृक्षों, लताओं और प्राचीन कुंजों से ढकी हुई है। इसे 'गहवर वन' कहा जाता है।