
ब्रज के 'प्राण-प्रिय' सखा श्री सुबल: कृष्ण के प्रतिरूप और अनन्य प्रेम की दिव्य गाथा
गौड़ीय वैष्णव दर्शन में 'सुबल-मिलन' का विशेष महत्व है। सुबल जी का चरित्र यह सिखाता है कि भगवान की प्राप्ति के लिए कभी-कभी अपनी पहचान भी खोनी पड़ती है।

गौड़ीय वैष्णव दर्शन में 'सुबल-मिलन' का विशेष महत्व है। सुबल जी का चरित्र यह सिखाता है कि भगवान की प्राप्ति के लिए कभी-कभी अपनी पहचान भी खोनी पड़ती है।

हित उत्सव, श्री हित हरिवंश महाप्रभु के आदर्शों, उनकी वाणी और उनके द्वारा स्थापित 'राधावल्लभ' तत्व की महिमा का गान करने का पर्व है।

तोक जी उन भाग्यशाली सखाओं में से थे, जिन्होंने यमुना किनारे 'वन-भोजन' के समय कृष्ण के साथ एक ही थाली में भोजन किया।

जब कृष्ण यमुना के काली दह में कूद गए, तो मनसुखा जी किनारे पर खड़े होकर हाहाकार करने लगे। 'गर्ग संहिता' के अनुसार, वे यमुना में कूदने ही वाले थे कि बलराम जी ने उन्हें रोका।