
दिल्ली में ब्रज: लाडली जी का बड़ा मंदिर और ललित संप्रदाय का इतिहास
राजा सवाई जयसिंह की सभा में मात्रा 10 वर्ष की आयु में श्री वंशी अली जी ने अपनी विद्वत्ता का ऐसा परिचय दिया कि राजा जयसिंह ने इन्हें अपने गुरु-तुल्य स्थान दिया

राजा सवाई जयसिंह की सभा में मात्रा 10 वर्ष की आयु में श्री वंशी अली जी ने अपनी विद्वत्ता का ऐसा परिचय दिया कि राजा जयसिंह ने इन्हें अपने गुरु-तुल्य स्थान दिया

भगवान शिव जिस स्थान पर बैठकर दर्शन की 'आशा' में प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी स्थान को आशेश्वर कहा गया।

सीधे ब्रज के आंतरिक क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए ब्रिटिश पी.डब्ल्यू.डी. (PWD) और तत्कालीन रेल नेटवर्क के समन्वय से इस मीटर-गेज लाइन का विस्तार किया गया था।

ब्रह्मगिरी और विष्णुगिरी पहाड़ियों के बीच की जो ढलान वाली घाटी है, वह घने वृक्षों, लताओं और प्राचीन कुंजों से ढकी हुई है। इसे 'गहवर वन' कहा जाता है।