
भक्ति के पंचतत्व एवं अनन्य शरणागति के साक्षात विग्रह श्रीवास पंडित महाप्रभु
श्रीवास आंगन धन्य है, जहाँ नाचे गौर निताई। भक्ति शक्ति परकट भई, कलिमल दियो नसाई ॥

श्रीवास आंगन धन्य है, जहाँ नाचे गौर निताई। भक्ति शक्ति परकट भई, कलिमल दियो नसाई ॥

रूपलाल जी को भक्ति और शास्त्र ज्ञान विरासत में मिला था। उनके पूर्वजों ने श्री राधावल्लभ लाल की सेवा को ही अपना जीवनोद्देश्य माना था। रूपलाल जी ने अल्पायु में ही संप्रदाय के..

श्री हित नागरी दास जी का जन्म संवत 1820 के आसपास वृंदावन के प्रतिष्ठित गोस्वामी परिवार में हुआ था। वे श्री हित हरिवंश महाप्रभु की परंपरा के उत्तराधिकारी थे।

हरिवंश महाप्रभु ने 'राधावल्लभ संप्रदाय' की नींव रखी। इस संप्रदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ श्री राधा को ही 'अधिष्ठात्री देवी' माना जाता है।