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श्री लोहवन—ब्रज का वह 'लौह-कवच' जहाँ भगवान कृष्ण ने किया था लोहासुर का अंत
·ब्रज के द्वादश वन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री लोहवन—ब्रज का वह 'लौह-कवच' जहाँ भगवान कृष्ण ने किया था लोहासुर का अंत

"लोहजंघं वनं पुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्। तत्र गत्वा नरो देवि मम लोकं स गच्छति॥" अर्थात्: लोहजंघ (लोहवन) अत्यंत पुण्यदायी और सभी पापों को नष्ट करने वाला है। जो भी मनुष्य यहाँ भक्तिपूर्वक दर्शन करता है, वह निश्चित रूप से विष्णु लोक को प्राप्त होता है।

श्री भद्रवन—ब्रज का वह 'कल्याणकारी' धाम जहाँ की रज में समाहित है अनंत सौभाग्य
·ब्रज के द्वादश वन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री भद्रवन—ब्रज का वह 'कल्याणकारी' धाम जहाँ की रज में समाहित है अनंत सौभाग्य

गर्ग संहिता (वृंदावन खंड): महर्षि गर्ग द्वारा रचित 'गर्ग संहिता' में भद्रवन को 'नित्य सिद्ध' वन कहा गया है। यहाँ वर्णन मिलता है कि यमुना के तट पर स्थित इस वन की लताएं और वृक्ष साक्षात वेदों की ऋचाओं का गान करते हैं। यह वन भगवान की 'गोष्ठ-लीला' का मुख्य केंद्र रहा है।

ब्रज का वह वन-धाम जहां गोपी भाव के लिए मां लक्ष्मी ने त्याग वैभव और की तपस्या
·ब्रज के द्वादश वन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

ब्रज का वह वन-धाम जहां गोपी भाव के लिए मां लक्ष्मी ने त्याग वैभव और की तपस्या

"बिल्वपत्रैश्चितं रम्यं बिल्ववनं मुनीश्वरैः। तत्र दृष्ट्वा महालक्ष्मीं सर्वान्कामानवाप्नुयात्॥" अर्थात्: मुनीश्वरों द्वारा सेवित यह बिल्ववन (बेलवन) अत्यंत रमणीय है। यहाँ महालक्ष्मी के दर्शन करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

श्री भांडीरवन—ब्रज का वह दिव्य साक्षी जहाँ स्वयं ब्रह्मा जी ने कराया था श्री राधा-कृष्ण का विवाह
·ब्रज के द्वादश वन·By प्रमोद कुमार शुक्ला

श्री भांडीरवन—ब्रज का वह दिव्य साक्षी जहाँ स्वयं ब्रह्मा जी ने कराया था श्री राधा-कृष्ण का विवाह

"भांडीरं नाम तद्वनं सर्वपापप्रणाशनम्। तत्र दृष्ट्वा तु देवेशं पुनर्जन्म न विद्यते॥" अर्थात्: भांडीर नाम का यह वन सभी पापों को नष्ट करने वाला है। यहाँ के अधिष्ठाता देव के दर्शन मात्र से पुनर्जन्म नहीं होता।

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