
श्री मांट वन—ब्रज का वह दिव्य स्थल जहाँ सखाओं के साथ कृष्ण ने पाया 'छाक' का आनंद
यह वह स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर अपने ग्वाल-बालों के साथ प्रेम का जूठन साझा किया था।

यह वह स्थान है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर अपने ग्वाल-बालों के साथ प्रेम का जूठन साझा किया था।

पद्म पुराण के अनुसार, शेषशय्या वन वह स्थान है जहाँ भगवान ने अपनी 'योगमाया' के साथ सृष्टि के कल्याण हेतु विचार-विमर्श किया था। इसे 'ज्ञान वन' भी कहा जाता है

आज के आधुनिक युग में, जिसे हम 'मथुरा शहर' कहते हैं, वह कभी इन्ही वनों का हिस्सा था। यद्यपि कंक्रीट के जंगलों ने प्राकृतिक वनों की जगह ले ली है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में वर्णित इसकी पवित्रता आज भी अक्षुण्ण है।

भगवान वाराह ने इस वन की महिमा गाते हुए इसे 'पापमोचनी' स्थली बताया है। वाराह पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति यमुना के इस तट (रामघाट) पर स्नान कर इस वन में ध्यान लगाता है, उसे राजसूय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।