
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सागर गोस्वामी की लेखनी से जन्मी राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत नई काव्य रचना
बहुआयामी प्रतिभा, मॉडर्न लुक और हंसमुख अंदाज़ के लिए युवाओं के बीच पहचाने जाने वाले सागर गोस्वामी

बहुआयामी प्रतिभा, मॉडर्न लुक और हंसमुख अंदाज़ के लिए युवाओं के बीच पहचाने जाने वाले सागर गोस्वामी

महान पौराणिक व्यास-शिष्य महर्षि रोमहर्षण जी, सूत जी के पूज्य पिता थे। रोमहर्षण जी को स्वयं भगवान वेदव्यास जी ने पुराणों का ज्ञान प्रदान किया था। रोमहर्षण जी का नाम 'रोमहर्षण' इसलिए पड़ा क्योंकि जब वे भगवान की कथा सुनाते थे, तो सुनने वालों के रोंगटे (रोम) हर्ष से खड़े हो जाते थे।

व्यास जी की लीलाएँ हमें सिखाती हैं कि चाहे मनुष्य कितना भी बड़ा विद्वान, तपस्वी या शास्त्रज्ञ क्यों न बन जाए, यदि उसके हृदय में भगवान के प्रति प्रेम, करुणा, नम्रता और अनन्य शरणागति नहीं है, तो उसका सारा ज्ञान व्यर्थ है।

परंतु भक्ति मार्ग के आचार्यों (जैसे श्री रूप गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी और श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर) का मानना है कि शुकदेव जी का अद्वैत ज्ञान और निर्गुण समाधि केवल उनकी भक्ति की पृष्ठभूमि (Background) थी।