"शांतनुं नाम तद्वनं सर्वकामप्रदायकम्। तत्र स्नात्वा नरो देवि मत्पदं याति निश्चितम्॥"
अर्थात्: शांतनु नाम का यह वन सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। जो भी मनुष्य यहाँ श्रद्धापूर्वक स्नान और दर्शन करता है, वह निश्चित रूप से परम पद को प्राप्त होता है।
"कुमुदं नाम तद्वनं सर्वपापप्रणाशनम्। तत्र गत्वा नरो देवि मम लोकं स गच्छति॥"
अर्थात्: कुमुद नाम का यह वन समस्त पापों का विनाश करने वाला है। जो भी मनुष्य यहाँ भक्तिपूर्वक प्रवेश करता है, वह मेरे (विष्णु) लोक को प्राप्त होता है।
शुकदेव गोस्वामी ने इस वन को 'सुगंधित और शीतल' बताया है। भागवत के अनुसार, धेनुकासुर वध के बाद जब ताड़ के फल गिरे, तो उनकी खुशबू पूरे ब्रजमंडल में फैल गई।
प्रमोद शुक्ला केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि ब्रह्म-मध्व-गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संवाहक भी हैं। पत्रकारिता की पारिवारिक पृष्ठभूमि और इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ-साथ उनके जीवन का मूल आधार जीव गोस्वामी परंपरा की भक्ति और शरणागति है।
मैं वृंदावन को छोड़कर एक पैर भी कहीं बाहर नहीं जाता)—भगवान श्रीकृष्ण का यह कथन इस भूमि की महत्ता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।
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