Khabar for India

Featured

राम ते अधिक राम कर दासा': महर्षि वाल्मीकि का अद्वितीय भक्त चरित्र और उनकी पावन लीलाएं
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

राम ते अधिक राम कर दासा': महर्षि वाल्मीकि का अद्वितीय भक्त चरित्र और उनकी पावन लीलाएं

महर्षि वाल्मीकि 'रत्नगिरि' या 'रत्नाकर' के नाम से जाने जाते थे। वे अपने कुटुंब के भरण-पोषण के लिए तमसा नदी के बीहड़ वनों में राहगीरों को लूटने और हिंसा का कार्य करते थे। उनके जीवन में न तो धर्म का ज्ञान था और न ही भक्ति का आस्वादन।

 सृष्टि के रचयिता ही नहीं, भगवद्-भक्ति के भी परम मुकुटमणि हैं पितामह ब्रह्मा
·Bhatkmal·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

सृष्टि के रचयिता ही नहीं, भगवद्-भक्ति के भी परम मुकुटमणि हैं पितामह ब्रह्मा

ब्रह्मा जी 'आचार्य' और 'भक्त' की भूमिका में हैं। एक सच्चा भक्त कभी यह नहीं चाहता कि भगवान को छोड़कर उसकी स्वयं की पूजा हो। ब्रह्मा जी ने स्वयं भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रचार किया। वे जीवों को अपनी ओर आकर्षित करने के बजाय सीधे 'हरि-चरणों' की ओर भेजते हैं।

भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास
·Bhatkmal·By प्रमोद कुमार शुक्ला

भक्तराज शिव जब बने अपने ही भक्तों के दास

भगवान शिव काल के भी काल 'महाकाल' बनकर शिवलिंग से प्रकट हो गए और यमराज को परास्त कर मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। भक्त की रक्षा के लिए मृत्यु के नियम को बदल देना शिव के भक्त-प्रेमी स्वभाव को दर्शाता है।

आज भी मजार पर क्यों रुकता है जगन्नाथ जी का रथ पढ़ें भक्त सालबेग की अमर कथा
·Bhatkmal·By आशुतोष दास (अंकित जुनेजा)

आज भी मजार पर क्यों रुकता है जगन्नाथ जी का रथ पढ़ें भक्त सालबेग की अमर कथा

सालबेग का पालन-पोषण एक मुस्लिम माहौल में हुआ, लेकिन उनकी माता के मन में छिपी हिंदू धार्मिक चेतना ने उनके अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डाला। ओड़िशा के प्रसिद्ध इतिहासकार और शोधकर्ता डॉ. के.सी. पाणिग्रही....

Latest From Topics